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नीचे दी गई शीट में अत्यन्त संक्षिप्त जानकारी दी गई है, ऐसा संक्षिप्त नोट सामान्य जानकारी की दृष्टि से ठीक है, लेकिन जब वास्तविक इस्तेमाल की बात आती है तो व्यक्ति के पास गहरी एवं अद्यतन जानकारी होनी चाहिए.
आयकर के प्रावधानों को लागू करने के लिए आयकर अधिनियम, मूल्यांकनों हेतु इसके अंतर्गत बनाए गये नियमों तथा जानकारी उपलब्ध कराने के लिए फॉर्मेट्स, विभिन्न स्पष्टीकरण तथा समय-समय पर जारी परिपत्रों का उपयोग किया जाता है. कई बार केस लॉज, उद्योग के प्रचलनों का भी संदर्भ लिया जाता है. एक गलत दावे से डिफॉल्ट, ब्याज, दण्ड आदि की नौबत आ सकती है.
उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने यह सार-संक्षेप सरल भाषा में तैयार करने की पूरी कोशिश की है तथा इसे समझने में आसान स्वरुप में पेश किया है.
कर यानी टैक्स पर लेख
अब जबकि वित्तीय वर्ष 2008- 09 समाप्त होने की ओर है, हम सबके लिए यह चिन्ता शुरु हो है किस पर अपने निवेशों की प्लानिंग करें जिसके कि टैक्स की ़ज़्यादा से ़ज़्यादा बचत हो सके. आयकर भरने और उसका विवरण तैयार करने तथा समय पर आयकर रिटर्न फाइल करने की चिन्ता हमें परेशान करती रहती है. ऐसे में हम या तो अपने सीए की शरण में जाते हैं. या फिर अपने ऑर्गेनाइजेशन के आयकर का काम देखने वाले कर्मचारी को परेशान करने लगते हैं कि वो हमें समझाए कि किस तरह ज्यादा से ़ज़्यादा टैक्स बचाया जा सकता है.
दरअसल आयकर के बारे में जानना और समझना उतना मुश्किल नहीं है जितना नज़र आता है. अगर हमें सभी लागू धाराओं की सही- सही जानकारी हो और कटौतियों के बारे में ठीक से मालूम हो तो हम उस पैसे को बचा सकते है, जो हम अपने सीए को देते हैं.
इस पुस्तिका का उद्देश्य आपको आयकर तथा संबंधित कानूनों के बारे में बेहतर रुप से समझने में मदद करना है. साथ ही हमारा मकसद यह भी है कि आपकी भाषा बातचीत करें तथा आयकर की प्लॉंनिंग को और भी रोचक तथा आसान तरीके से समझाएं .
आयकर से संबंधित विभिन्न धाराएं
आयकर अधिनियम 1961, जिसे सन 2008 में संशोधित किया गया, के अनुसार ऐसी 9 मुख्य धाराएं है जिन्हें हमें अवश्य जानना चाहिए:
धारा 80C: अधिनियम की एक सबसे महत्त्वपूर्ण धारा. यह धारा विभिन्न माध्यमों के अंतर्गत अधिकतम रु.1,00,000 तक के निवेश की अनुमति देती है. इन निवेशों में आपके बच्चे की शिक्षा हेतु ट्यूशन फीस से लेकर पब्लिक प्रोविडेन्ट फंड में निवेश तक आता है.
धारा 80C: जीवन बीमा तथा भविष्य निधि समेत निवेशों हेतु कटौती.
धारा 80-C को निर्धारण वर्ष 2006-2007 से शामिल किया गया. यह निर्धारिती द्वाए पूर्व वर्ष में, अर्हता प्राप्त राशियों पर सकल (कुल) आमदनी से कटौती दिलाती है.
मुख्य प्रावधान:
- कटौती केवल व्यक्ति या एचयूएफ को सकल कुल आमदनी से उपलब्ध है.
- यह कटौती इस बात से असम्बद्ध होते हुए प्रदान की जाती है कि क्या ऐसी राशि का भुगतान करदाता द्वारा अपनी टैक्स योग्य आमदनी से किया है या जमा कराया है.
- कटौती पूर्व वर्ष दौरान करदाता द्वारा किए गये विनिर्धारित अर्हक निवेशों/अंशदानों/भुगतानों के आधार पर उपलब्ध है.
- धारा 80C के अंतर्गत कटौती योग्य अधिकतम राशि रु. 1,00,000 है. साथ ही धारा 80C, 80CCC और 80CCD के अंतर्गत कटौतियों की कुल राशि भी रु. 1,00,000 है.
कटौती हेतु सकल अर्हक राशि:
निम्नलिखित प्रकृति के भुगतान अर्हक राशियां है:
- स्वयं, जीवनसाथी या बच्चे या एचयूएफ के लिए सदस्य के जीवन पर जीवन बीमा प्रीमियम (बजाज आलियान्स लाइफ इंश्योरेन्स) जो कि बीमा राशि के 20 प्रतिशत अधिकतम के विषयाधीन है.
- स्वयं, जीवनसाथी, बच्चे के नाम से लिए गये किए नॉन- कम्प्यूटेबल योग्य डेफर्ड एन्युटी प्लान के संदर्भ में
- भुगतान.
- सरकारी कर्मचारी से काटी गयी डेफर्ड एन्युटी (वेतन के 20 प्रतिशत अधिकतम के विषयाधीन)
- वैधानिक प्रोविडेन्ट फ़ंड तथा मान्यताप्राप्त प्रोविडेन्ट फ़ंड हेतु अंशदान (ऋण की अदायगी हेतु नहीं)
- स्वीकृत सुपर एनुएशन फ़ंड हेतु अंशदान
- VII नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स, सिरीज में सब्सक्रिप्शन
- भारतीय यूनिट ट्रस्ट तथा या एलआईसी म्यूच्युअल फ़ंड के यूलिप (यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेन्स प्लान) में सब्सक्रिप्शन
- एल आईसी के अधिसूचित एन्युटी प्लान हेतु भुगतान
- म्यूच्युअल फ़ंड की अधिसूचित फ़ंड्स हेतु सब्सक्रिप्शन
- म्यूच्युअल फ़ंड द्वारा स्थापित अर्धसूचित पेन्शन फ़ंड में अंशदान.
- नेशनल हाउसिंग बैंक की होम लोन अकाउन्ट योजना में सब्सक्रिप्शन के रुप में अदा की गई कोई राशि (तथा अर्जित ब्याज) या नेशनल हाउसिंग बैंक के किसी पेन्शन फ़ंड में अंशदान (वर्तमान में उपलब्ध नहीं)
- रिहायशी घरों की खरीद/निर्माण हेतु दीर्घकालीन फायनान्स प्रदान करने से जुड़ी सार्वजनिक क्षेत्र कंपनी या भारत में शहरों के नियोजन और विकास से क्षेत्र जुड़ी हाउसिंग बोर्ड की किसी योजना में सब्सक्रिप्शन के रुप मेंे अदा की गई राशि.
- करदाता के किन्हीं दो बच्चों की पूर्णकालिक शिक्षा हेतु भारत में किसी विश्वविद्यालय/कॉलेज/शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश हेतु ट्यूशन फीस या अन्यथा हेतु अदा की गई रकम.
- रिहायशी प्रॉपर्टी के निर्माण/खरीद की लागत हेतु कोई भुगतान जिसमें सरकारी बैंक, को ऑपरेटिव बैंक, एल आईसी, नेशनल हाउसिंग बैंक, करदाता का, जहां नियोक्ता एक सार्वजनिक कंपनी हो, विश्वविद्यालय या को ऑपरेटिव सोसायटी से लिए गये लोन का भुगतान भी शामिल है.
- इंफ्रास्ट्रक्चर से संबध किसी सार्वजनिक कंपनी के स्वीकृत डिबेचर्स तथा इक्विटी शेयर्स में निवेश की गई राशि जिसमें बिजली क्षेत्र या इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु प्रयुक्त म्युच्यूअल फ़ंड की यूनिट्स भी शामिल है.
- केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित एवं बनायी गई योजना (निर्धारण वर्ष 2007-2008 से लागू) के अनुसार किसी अनुसूचित बैंक की 5 वर्षीय या
- ज़्यादा की सावधि जमाओं में राशि
- नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर ऑर रुरल डेव्लपमेन्ट के किन्ही अधिसूचित बॉण्ड्स में सब्सक्रिप्शन
(निर्धारण वर्ष 2008-2009 से लागू)
- पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट्स नियम 1981 के अंतर्गत 5 वर्षीय की अवधि हेतु जमा, तथा
- सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम नियम 2004 के अंतर्गत अकाउन्ट में जमा
जमा रखने की न्यूनतम अवधि:
- यूनिट लिंक्ड इंश्योरेन्स प्लान-5 वर्ष
- लाइफ इंश्योरेन्स प्रीमियम-2 वर्ष
- रिहायशी प्रॉपर्टी के निर्माण या खरीद की लागत-5 वर्ष
- पोस्ट ऑफिस नियम 1981 में सावधी जमा-5 वर्ष
- सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्किम नियम 2004-5 वर्ष
धारा 80CCC: रिटायरमेन्ट प्लानिंग पहले कभी नहीं था इतना आकर्षक. अब आप अपने रिटायर जीवन के लिए हर साल रु. 1,00,000 तक की बचत कर सकते हैं. रु. 10,000 की पूर्व सीमा को अब हटा दिया गया है. लेकिन हमें एक बात को याद रखना है कि हम धारा 80C तथा धारा 80CCC के अंतर्गत कुल मिलाकर रु. 1,00,000 से अधिक का टैक्स लाभ नहीं ले सकते हैं.
धारा 80CCC: पेन्शन फंड्स में अंशदान हेतु कटौती
CCC धारा 80 निर्धारिती द्वारा भारतीय जीवन बीमा निगम या किसी अन्य बीमा कंपनी के किसी एन्युटी प्लान में, क्लॉज (23AAB) में संदर्भित फ़ंड से पेन्शन प्राप्त करने हेतु, अदा की गई या जमा की गई राशियों हेतु सकल (कुल) आमदनी से कटौती का प्रावधान करती है.
मुख्य प्रावधान:
- कटौती निवासी या अनिवासी व्यक्ति, भारतीय नागरिक या विदेशी नागरिक को उपलब्ध है.
- कटौती केवल तभी दी जा सकती है अगर टैक्सदाता ने अपनी टैक्स योग्य आमदनी से यह भुगतान किया है या जमा कराया है.
- धारा 80C के अंतर्गत कटौती की जा सकनेवाली अधिकतम राशि रु. 1,00,000 है तथा धारा 80C, 80CCC और 80CCD के अंतर्गत कटौतियों की कुल रकम भी रु. 1,00,000 है.
- सरेडर मूल्य, निर्धारिती या नामित व्यक्ति के हाथ मिलने के वर्ष टैक्स योग्य है.
- अगर 80CCC के अंतर्गत कटौती का दावा किया जाता है तो निर्धारिती या नामित व्यक्ति के हाथ मिलने वाली राशि, मिलने के वर्ष टैक्स योग्य होगी.
धारा 80D: अपने अथवा अपने जीवनसाथी, माता-पिता एवं बच्चों के स्वास्थ्य का बीमा करवाने के लिए अदा किया गया हेल्थ इंश्योरेन्स प्रीमियम भी आपको टैक्स की रियायत दिलाता है. इस धारा के अंतर्गत आप ज़्यादा से ज़्यादा रु 35,000 तक का दावा कर सकते हैं, रु. 15,000 अपने, जीवनसाथी तथा बच्चों के लिए और रु. 15,000 अपने माता-पिता के लिए, अगर आपने माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं तो यह सीमा रु. 20,000 तक होती है.
पात्र निर्धारिती: केवल व्यक्ति तथा हिन्दू अविभक्त परिवार.
क्षेत्र: इनके अंतर्गत अदा किया गया प्रीमियम:
- केन्द्रीय सरकार द्वारा स्वीकृत जनरल इंश्योरेन्स कॉर्पोरेशन की कोई मेडिक्लेम इंश्योरेन्स स्कीम, या
- इंश्योरेन्स रेग्युलेटरी एंड डेव्लपमेन्ट अथॉरिटी (आईआरडीए) द्वारा स्वीकृत कोई अन्य इंश्योरेन्स कंपनी.
भुगतान का माध्यम:
नकद के अलावा भुगतान का अन्य कोई भी माध्यम स्वीकार्य है, जिसमें क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान भी शामिल है.
कटौती:
- गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए: अदा की गई मेडिक्लेम इंश्योरेन्स प्रीमियम की राशि या रु. 15000, जो भी कम हो.
- आश्रित माता- पिता के लिए: अदा की गई मेडिक्लेम इंश्योरेन्स प्रीमियम की राशि या रु. 15,000, जो भी कम हो.
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए: अदा की गई मेडिक्लेम इंश्योरेन्स प्रीमियम की राशि या रु. 20,000, जो भी कम हो.
संरक्षण का क्षेत्र:
- व्यक्ति के लिए: निर्धारिती, जीवनसाथी, आश्रित माता- पिता तथा आश्रित बच्चों के स्वास्थ्य बीमा पर अदा गई राशि.
- एचयूएफ के लिए: परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य बीमा पर
धारा 80DD: किसी विकलांग आश्रित के उपचार पर किया गया कोई व्यय इस धारा के अंतर्गत आता है. इसकी ऊपरी सीमा इस समय रु. 50,000 निर्धारित की गई है जो कि अक्षमता की गंभीरता के आधार पर रु. 75,000 तक जा सकती है.
80DD. (1) जहां निर्धारित, जो कि व्यक्ति या हिन्दू अविभक्त परिवार हो, भारत का निवासी हो, जिसने पिछले साल के दौरान,
(अ) अपने आश्रित अक्षय व्यक्ति के चिकिस्ता उपचार (नर्सिंग सहित), प्राशिक्षण एवं स्वास्थ्यलाभ हेतु कोई व्यय किया हो;
या
(ब) अपने आश्रित अक्षम व्यक्ति की देखभाल हेतु इस बारे में बोर्ड द्वारा स्वीकृत तथा उपधारा (2) में विनिर्धारित
शर्तो के लिए विषयाधीन इस बारे में जीवन बीमा निगम या किसी अन्य बीमा कंपनी या प्रशासक या विनिर्धारित कंपनी द्वारा रची गई किसी योजना के अंतर्गत किसी राशि का भुगतान किया हो या जमा की गई हो,
निर्धारिती को इस धारा के प्रावधानों के अनुसार तथा विषयाधीन, पूर्व वर्ष के संबध में अपनी सकल आमदनी से पचास हजार रुपये की धनराशि की कटौती दी जाएगी:
बशर्तें जहां यह आश्रित व्यक्ति गंभीर रुप से अशक्त हो, इस उप-धारा के प्रावधानों को प्रभावित करते हुए शब्दों पचास हजार रुपयों को शब्दों पचहत्तर हजार रुपयों से प्रतिस्थापित किया गया है.
(2) उपधारा (1) के क्लॉज (ब) के अंतर्गत कटौती केवल तभी दी जाएगी, जब निम्नलिखित शर्तो को पूरा किया जाता है:
(अ) उपधारा (1) के क्लॉज (ब) में संदर्भित योजना उस व्यक्ति या हिन्दू अविभक्त परिवार के सदस्य की मृत्यु की दशा में, जिसके नाम पर योजना में सब्सक्रिप्शन किया गया है, की मृत्यु की दशा में आश्रित अक्षय व्यक्ति के हित में एन्युटी या एकमुश्त राशि के भुगतान का प्रावधान करती है;
(ब) निर्धारिती, उसकी तरफ से, आश्रित अक्षम व्यक्ति के हित में भुगतान प्राप्त करने के लिए आश्रित अक्षम व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति अथवा किसी ट्रस्ट को नामित करता है.
धारा 80DDB: विशिष्ट बीमारियों के उपचार के लिए रु. 40,000 तक की कटौती प्रदान की जाती है. रोगी द्वारा किसी सरकारी अस्पताल में उपचार करवाया गया हो. यह कटौती वरिष्ठ नागरिकों के लिए रु. 60,000 तक जा सकती है. इस धारा के अंतर्गत क्रॉनिक गुर्दे की विफलता, विषालु कै न्सर तथा पूरी तरह उभरा एक्वायर्ड इम्युनो-डेफिशिएन्सी सिन्ड्रॉम जैसी बीमारियों के उपचार में किए गये खर्चो को टैक्स से दूट प्राप्त है.
धारा 80DDB के अंतर्गत केवल उन बीमारियों/रोगों हेतु कटौती प्रदान की गई है जो की नियम 11DD में विनिर्धारित है.
सूची इस प्रकार है:
1. न्यूरोलॉजिकल बीमारियों जहां अशक्तता के स्तर को 40% तथा इससे अधिक प्रमाणित किया गया हो.
-डिमोन्शिया
-डिस्टोनिया मस्कुलोरम डिफॉर्मन्स
-मोटर न्यूरॉन डिजीज
-अटाक्सिया
-कोरिया
-हेमिबैलिस्हमस
-एफासिया
-पार्किन्सन्स रोग नियम
2. विषालु कैन्सर
3. पूरी तरह उभरी हुई एक्वायर्ड इम्युनो डफिशिएन्सी जिसे आमतौर पर एड्स कहा जाता है.
4. क्रॉनिक गुर्दे की विफलता
5. हेमोटोलॉजिकल विकार
-हेमोफिला
-थैलेसामिया
आपको यह सुनिश्चित करनें के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए कि क्या आपकी पत्नी की समस्या उपरोक्त में से किसी श्रेणी के अंतर्गत आती है.
अगर हां, रु. 40,000 तक (वरिष्ठ नागरिक के मामले में रु. 60,000) या वास्तव में किया गया व्यय, जो भी कम हो, पात्र होगा.
धारा 24: होम लोन पर अदा किया गया रु. 1,50,000 तक का ब्याज भी टैक्स की कटौती का पात्र है. यह सीमा अपने कब्जे वाली प्रॉपर्टी टैक्स के लिए है. अगर प्रॉपर्टी को लीज पर दिया गया है तो कटौती का दावा की जा सकनेवाली ब्याज की रकम पर कोई सीमा नहीं है.
आयकर अधिनियम की धारा 24 के अंतर्गत मकान के अधिग्रहण निर्माण या नवीकरण हेतु लिए गये पर्सनल लोन पर रु. 1.5 लाख तक टैक्स की कटौती का दावा किया जा सकता है. उधार लेने वाले निर्माण कार्य पूरा होने तथा प्रॉपर्टी पर कब्जा देने के बाद ही टैक्स लाभों का दावा कर सकते हैं.
धारा 80E: उच्च शिक्षा हेतु लिए गये लोन पर ब्याज की अदायगी इस धारा के अंतर्गत आती है. वर्तमान में इस धारा के अंतर्गत दावा की जानेवाली राशि की कोई ऊपरी सीमा नहीं है. बच्चों तथा जीवनसाथी की शिक्षा के लिए लिया गया लोन भी इसकी पात्रता रखता है.
धारा 80E: उच्च शिक्षा के लिए प्राप्त ऋण की अदायगी के संबध में कटौती.
(1) निर्धारिती, व्यक्ति की कुल आमदनी की गणना करते समय उसके द्वारा अपनी उच्च शिक्षा के प्रयोजन हेतु किसी वित्तीय संस्था या किसी स्वीकृत धमार्थ संस्था से लिए गये लोन या उस पर ब्याज के भुगतान के रुप में उसकी टैक्स योग्य आमदनी से पूर्व वर्ष में अदा की गई किसी राशि की, इस धारा के प्रावधानों के अनुुसार तथा विषयाधीन, कटौती की जाएगी:
बशर्तें इस प्रकार कटौती की गई राशि पच्चीस हजार रुपये से अधिक न हो.
(2) उपधारा (1) में विनिर्धारित कटौती आरंभिक निर्धारण वर्ष के तुरन्त बाद के सात निर्धारण वर्ष के संबध में कुल की आमदनी गणना करने या उपधारा (1) में संदर्भित लोन के निधारिती द्वारा ब्याज सहित पूर्ण रुप से अदा करने हेतु, जो भी पहले हो, स्वीकार्य होगी.
(3) इस धारा के प्रयोजन हेतु,-(अ) ''स्वीकृत धर्मार्थ संस्थान'' से तात्पर्य कोई विनिर्धारित संस्थान या जैसी भी स्थिति हो, धर्मार्थ प्रयोजनों हेतु स्थापित कोई संस्थान, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा धारा 10 के क्लॉज (23C80G ) के अंतर्गत अधिसूचित किया गया हो या धारा की उपधारा (2) के क्लॉज (a) में संदर्भित संस्थान;
(ब) ''वित्तीय संस्थान'' से तात्पर्य कोई बैकिंग कंपनी है जिस पर बैकिंग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें उस एक्ट की धारा 51 में संदर्भित कोई बैंक या बैंकिंग संस्था शामिल है); या कोई अन्य वित्तीय संस्था जिसे केन्द्र सरकार, इस हेतु शासकीय गजट में अधिसूचित कर सकती है;
(स) ''उच्च शिक्षा'' से तात्पर्य इंजीनियरिंग, मेडिसिन, मैनेजमेन्ट में किसी ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कोसर्र् हेतु या एप्लाइड साइंसेज़ या प्योर साइंसेज जिसमें गणित व सांख्यिकी भी शामिल है, में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स हेतु पूर्ण-कालिक अध्ययन है.
(द) ''आंरभिक निर्धारण वर्ष'' से तात्पर्य संबंधित पूर्व वर्ष से है जिसमें निर्धारिती लोन या उस पर ब्याज को चुकाना शुरु करता है.
80Gधारा : कतिपय फ़ंड्स, धर्मार्थ संस्थाओं आदि को किया गया नकद दान इस धारा के अंतर्गत कटौती की पात्रता प्राप्त करता है. वस्तु रुप में दिए गये दान पर कोई कटौती की पात्रता नहीं मिलती है. जिस संस्था को दान किया गया हो उससे प्राप्त रसीद को आय की रिटर्न के साथ संलग्न किया जाना चाहिए. इस धारा के अंतर्गत दावा की जानेवाली अधिकतम राशि (सकल कुल आमदनी- अन्य धाराओं के अंतर्गत दावा किए गये छूट) का 10% है.
80Gधारा : कतिपय फ़ंड्स, धर्मार्थ संस्थांओं आदि को दान के संबंध में कटौती.
(1) किसी निर्धारिती की कुल आमदनी की गणना करते समय इस धारा के प्रावधानों के अनुसार तथा विषयाधीन कटौती की जाएगी - (i) ऐसी स्थित जहां उपधारा (2) में विनिर्धारित राशियों के योगफल में उपधारा (iiia) या उपधारा (iiiaa) या उपधारा (iiiab) या उपधारा (iiie) या उपधारा (iiif) या उपधारा (iiig) या उपधारा (iiih) उपधारा (iiiha) या उपधारा (iiihb) या उपधारा (iiihc) या उपधारा (iiihd) य उपधारा (iiihe) या उपधारा (iiihf) या उपधारा (iiihg) या उपधारा (iiihh) या उपधारा (iiihi) या उपधारा (vii) क्लॉज (a) में विनिर्धारित प्रकृति की राशियां शामिल हों, योगफल के समान राशि या, जैसी भी स्थिति हो, ऐसी प्रकृति की राशियों का योगफल तथा तथा से योगफल के शेष का पचास प्रतिशत; तथा
(ii) किसी अन्य मामले में, उपधारा (2) में विनिर्धारित राशियों के योगफल के पचास प्रतिशत समान राशि.
(2) उपधारा (1) में संदर्भित राशियां नियमानुसार होंगी, जैसे कि :- (अ) निर्धारिती द्वारा पूर्व वर्ष में दान के रुप में निन्मलिखित को अदा की कोई राशि - (i) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय सुरक्षा कोष; या
(ii) नेशनल कमेटी द्वारा 17 अगस्त 1964 को आयोजित अपनी बैंठक में ग्रहीत डीड ऑफ डिक्लेरेशन में संदर्भित जवाहरलाल नेहरु मेमोरियल फ़ंड; या
(iii) प्रधानमंत्री सूखा राहत कोष; या
(iiia) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष; या
(iiiaa) प्रधानमंत्री का अर्मेनिया भूकम्प राहत कोष; या
(iiiab) अफ्रीका (जन अंशदान-भारत) कोष; या
(iiib) राष्ट्रीय बाल कोष; या
(iiic) इंदीरा गांधी स्मारक ट्रस्ट, जिसका घोषणा पत्र 21 फरवरी 1985 को नई दिल्ली में रजिस्टर्ड किया गया था; या
(iiid) राजीव गांधी फाउन्डेशन, जिसका घोषणापत्र 21 जून 1991 को नई दिल्ली में रजिस्टर्ड किया गया था; या
(iiie) साप्रदायिक सौहार्द हेतु राष्ट्रीय फाउन्डेशन; या
(iiia) कोई विश्वविद्यालय या राष्ट्रीय महत्त्व का कोई शैक्षणिक संस्थान जिसे इस हेतु विनिर्धारितअथॉरिटी द्वारा स्वीकृत किया गया हो; या
(iiig) महाराष्ट्र मुख्यमंत्री का राहत कोष, 1 अक्तूबर 1993 से 6 अक्तूबर 1993 की अवधि हेतु या मुख्यमंत्री के भूकम्प राहत कोष को; या
(iiih) किसी जिले में उस जिले के कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कोई जिला साक्षरता समिति, जिसका उद्देश्य उस जिले के गावों व कस्बों में प्राथमिक शिक्षा को सुधारना तथा साक्षरता व साक्षरता पश्चात की गतिविधियों को प्रोत्साहित करना हो.
स्पष्टीकरण : इस उप-धारा के प्रयोजन हेतु ''कस्बे'' का अर्थ ऐसा कस्बा है, जिसकी आबादी पिछली जनगणना के अनुसार एक लाख से अधिक न हो, जिसमें संबंधित आंकर्ड़ं पूर्व वर्ष के प्रथम दिन से पहले प्रकाशित हुए हों; या
(iiiha) नेशनल ब्लड ट्रांस्फ्यूजन कॉउन्सिल या कोई स्टेट ब्लड ट्रांस्फ्यूजन कॉउन्सिल जिसका एकमात्र उद्देश्य भारत में ब्लड बैंक्स के प्रचालन तथा आवश्यकताओं से संबंधित सेवाओं का नियंत्रण, पर्यवेक्षण, विनियमन या प्रोत्साहन देना हो.
स्पष्टीकरण : इस उपधारा के प्रयोजन हेतु,- (अ) ''नेशनल ब्लड ट्रांस्फ्यूजन कॉउन्सिल'' से तात्पर्य सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 (1860 का 21) के अंतर्गत रजिस्टर्ड सोसायटी से है, जिसमें भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव के स्तर का अधिकारी जो एड्स कंट्रोल प्रोजेक्ट में चेयरमैन के रुप में कार्यरत हो, भले ही उसे कोई भी नाम दिया गया हो;
(ब) ''स्टेट ब्लड ट्रांस्फ्यूजन कॉउन्सिल'' से तात्पर्य नेशनल ब्लड ट्रांस्फ्यूजन कॉउन्सिल के परामर्श से सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 (1860 का 21) या भारत के किसी भी भाग में प्रभावी इस एक्ट के समकक्ष कानून के अंतर्गत रजिस्टर्ड सोसायटी से है तथा जिसमें उस राज्य का सचिव, जो कि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित हो, अध्यक्ष के रुप में कार्यरत हो भले ही उसे कोई भी नाम दिया गया हो; या
(iiihb) रा़ज़्य सरकार द्वारा गरीबों को चिकित्सा राहत उपलब्ध कराने के लिए स्थापित कोई कोष; या
(iiihc) संघकी सशस्त्र सेनाओं द्वारा स्थापित आर्मी सेन्ट्रल वेलफयर फ़ंड या इंडियन नेवल बेनोवोलेन्ट फ़ंड या एयरफोर्स सेन्ट्रल वेलफेयर फंड, जिनका प्रयोजन अपने पूर्व तथा वर्तमान सदस्यों या उनके आश्रितों का कल्याण है.
(iiihd) आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री का सायक्लोन (चक्रवात) राहत कोष, 1996; या
(iiihe) नेशनल इलनस एलिस्टेन्स फ़ंड, या
(iiihf) मुख्यमंत्री राहत कोष या लेफ्टिनेन्ट-गवर्नर का राहत कोष, किसी राज्य या केन्द्र सासित प्रदेश के मामले में, जैसी भी स्थिति हो;
तथापि शर्त यह है कि ऐसा फ़ंड - (अ) राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश में, जैसी भी स्थिति हो, अपनी तरह का स्थापित एकमात्र फ़ंड हो;
(ब) राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश, जैसी भी स्थिति हो, के मुख्य सचिव या वित्त विभाग के पूर्ण नियंत्रण में हो;
(क) राज्य सरकार या लेफ्टिनेन्ट गवर्नर, जैसी भी स्थिति हो, द्वारा विनिर्धारित किए गये अनुसार प्रशासित किया जाता हो; या
(iiihg) केन्द्रीय सरकार द्वारा नेशनल स्पोर्ट्स फ़ंड स्थापित किया जाना हो; या
(iiihh) केन्द्रीय सरकार द्वारा नेशनल कल्चरल फ़ंड स्थापित किया जाना हो; या
(iiihi) केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित टेक्नोलॉजी विकास एवं प्रयोज्यता हेतु फ़ंड; या
(iv) कोई अन्य फ़ंड या संस्था जिस पर यह धारा लागू होती हो; या
(v) परिवार नियोजन के प्रचार के अलावा किसी अन्य धर्मार्थ प्रयोजन हेतु सरकारी या किसी स्थानीय अथॉरिटी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए; या
(vi) धारा10 के क्लॉज (20A) में संदर्भित कोई अथारिटी; या (vii) परिवार नियोजन के प्रचार के प्रयोजन हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा इस हेतु 1014 में स्वीकृत किसी स्थानीय अथॉरिटी, संस्थान यवा एसोशिएन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
(b) निर्धारित द्वारा पूर्व वर्ष में किसी ऐसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या अन्य स्थान के नवीकरण या रिपेेयर हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा शासकीय गजट में किसी राज्य या राज्यों में विख्यात ऐतिहासिक; वास्तुशास्त्र या कलात्मक महत्त्व या पूजा स्थल के रुप में अधिसूचित किया हो.(4) जहां उपधारा (2)क्लॉज (a) तथा क्लॉज (b) के उप- क्लॉज (iv),(v), (vi), (via),तथा (vii) में संदर्भित राशियों का योगफल, कुल सकल आय (उस अंश तक घटाने पर इस एक्ट के किसी प्रावधान के अंतर्गत आयकर नहीं देय है तथा कोई अन्य राशि जिसके संदर्भ में निर्धारिती इस चैप्टर के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत कटौती पाने का पात्र ह, के दस प्रतिशत से अधिक हो, तो उपधारा (1) के अंतर्गत जिसके तहत कटौती दी जाती है, हेतु राशियों के योगफल की गणना करने के लिए कुल सकल आप के दस प्रतिशत से अधिक की राशि को अनदेखा किया जाएगा.
(5) यह धारा उपधारा (2) के क्लॉज (a) के उप-क्लॉज (iv) में संदर्भित किसी संस्था या फ़ंड को किए जाने वाले दान को केवल तभी लागू होती है अगर इसे किसी धमार्थ प्रयोजन के लिए भारत में स्थापित किया गया हो तथा अगर यह निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती हो, जैसे कि ; (i) जहां संस्था या फ़ंड कोई आमदनी अर्जित करता हो, ऐसी आमदनी धारा 11 तथा 12 या धारा 10 के क्लॉज (23) या क्लॉज (23AA) या क्लॉज (23C) प्रावधानों के अंतर्गत के कुल आमदनी में शामिल किए जाने की पात्र नहीं होगी;
तथापि शर्त यह है कि जहां कोई संस्था या फ़ंड मुनाफे तथा बिजनेस से फायदे के रुप में कोई आमदनी अर्जित करता हो, तो धारा 11 के प्रावधानों के अंतर्गत इसकी कुल आमदनी में इस आय को शामिल न किए जाने की शर्त ऐसी आमदनी के संबंध में लागू नहीं होगी, अगर- (अ) संस्था या फ़ंड द्वारा ऐसे बिजनेस के लिए अलग लेखा- बहियां रखी जाती है;
(ब) संस्था या फ़ंड को किए गये दान का इस्तेमाल उनके द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से ऐसे बिजनेस के, प्रयोजन हेतु नहीं किया जाता है; तथा
(स) संस्था या फ़ंड द्वारा दान करने वाले व्यक्ति को उस आशय का सर्टिफिकेट जारी किया जाता है कि इनके द्वारा ऐसे प्रत्येक बिजनेस के लिए अलग खाता बहियां रखी जाती हैं तथा ऐसे दान का इस्तेमाल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से ऐसे बिजनेस के प्रयोजन हेतु नहीं किया जाएगा;
(ii) इंस्ट्रमेन्ट जिसके अंतर्गत संस्था या फ़ंड की स्थापना हुई है या संस्था अथवा फ़ंड को शासित करनेवाले नियम ऐसा कोई प्रावधान नहीं करते है कि किसी भी समय संस्था या फ़ंड की आमदनी या सम्पतियों के किसी हिस्से को धर्मार्थ प्रयोजनों के अलावा किसी अन्य प्रयोजन हेतु ट्रांस्फर किया या उसमें लगाया जाए.
(iii) संस्था या फ़ंड द्वारा किसी विशेष धार्मिक समुदाय या जाति को फायदा पहुंचाने की बात न कही गई हो;
(iv) संस्था या फ़ंड द्वारा अपनी प्राप्तियों तथा व्यय का नियतमित अकाउन्ट रखा जाता है;
(v ) संस्था या ़फ़ंड की स्थापना एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट हुई हो या वह सोसायटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 (1860 का 21) के अंतर्गत रजिस्टर्ड हो या इस एक्ट के समतुल्य भारत के किसी भाग में प्रभावी कानून के अंतर्गत हा या कंपनीज़ एक्ट 1956 (1956 का 1) की धारा 25 के अंतर्गत हो या कानून द्वारा स्थापित कोई विश्वविद्यालय हो, या सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त कोई अन्य शैक्षणिक संस्थान हो या कानून द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय हो, या कानून द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हो या धारण 10,1022 के क्लॉज (23) के प्रयोजन हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा स्वीकृत एक संस्थान हो या सरकार अथवा किसी स्थानीय अथॉरिटी द्वारा पूर्णत: या आशिंक रुप से वित्त पोषित कोई संस्थान हो;
(vi) 31 मार्च 1992 के बाद किए गये दान के संबध में, संस्था या फ़ंड को कमिशनर द्वारा इस हेतु बनाए गये नियमों के अनुसार उस समय के लिए स्वीकृत किया हो:
लेकिन शर्त यह है कि कोई स्वीकृति, ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए जैसा कि स्वीकृति में उल्लेख किया गया हो, के लिए, होगी, लेकिन पांच निर्धारण वर्षो से अधिक के लिए नहीं होगी.
(5A) जहां उस धारा के अंतर्गत किसी कटौती का दावा किया गया है तथा उपधारा (2) में विनिर्धारित किसी राशि के संबंध में किसी निर्धारण वर्ष हेतु उसे स्वीकार किया गया है तो जिस राशि के संबंध में इस प्रकार कटौती की स्वीकृति दी गई है, उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष हेतु इस एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत कटौती की पात्रता नहीं प्राप्त करेगी
(5B) उपधारा (5) के क्लॉज (ii) तथा व्याख्या 3 में निहित किसी बात के प्रतिकूल होते हुए, कोई संस्था या फ़ंड जो कि किसी पूर्वे वर्ष के दौरान व्यय करता है, जो कि धार्मिक प्रकृति का है तथा पूर्व वर्ष की कुल आय के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं है, को ऐसी संस्था या फ़ंड माना जाएगा जिस पर इस धारा के प्रावधान लागू होते हैं.
स्पष्टीकरण 1: एक संस्था या फ़ंड जिसकी, स्थापना अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों या महिलाओं तथा बच्चों के हित के लिए हुई है उसे उपधारा (5) के क्लॉज के अर्थ में धार्मिक समुदाय या जाति के हित हेतु अभिव्यक्त संस्था या फ़ंड नहीं माना जाएगा.
स्पष्टीकरण 2 : संदेहों को दूर करने के लिए, एतदद्वारा यह घोषित किया जाता है कि किसी संस्था या फ़ंड जिस पर उपधारा (5) लागू होती है को किए गये किसी दान के संदर्भ में जिसके लिए निर्धारिती कटौती हेतु पात्र है, सिर्फ निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों कारणों के आधार पर इन्कार नहीं किया जाएगा :
(1) कि दान के पश्चात, संस्था या फ़ंड की आय का कोई हिस्सा इसलिए टैक्स योग्य हो गया है क्योंकि 1024A धारा 11, धारा 12, धारा12A, के किसी प्रावधान का अनुपालन नहीं किया गया है.
(ii) धारा 13 की उपधारा (1) के क्लॉज (C) के अंतर्गत संस्था या फ़ंड को धारा13 की उपधारा (2) के क्लॉज (H) में संदर्भित किसी निवेश से उत्पन्न होने वाली आय के लिए धारा 12 या धारा 11 के अंतर्गत इन्कार किया गया है, जहां इसके द्वारा किसी कंसर्न में निवेशित फ़ंड्स का योगफल उस कंसर्न की पूंजी के पांच प्रतिशत से अधिक न हो.
स्पष्टीकरण 3 : इस धारा में ''धमार्थ प्रयोजन'' में एसा कोई प्रयोजन शामिल नहीं है जिसका सम्पूर्ण या तकरीबन सम्पूर्ण धार्मिक प्रकृति का नहीं है.
स्पष्टीकरण 4 : इस धारा के प्रयोजन हेतु, धारा 10 के क्लॉज (23) के प्रयोजन हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा स्वीकृत किसी एसोशिएशन के भी तथा प्रत्येक एसोशिएशन या संस्था को जिसे उक्त क्लॉज के प्रयोजन हेतु केन्द्रीय सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया हो, धर्मार्थ प्रयोजन हेतु भारत में स्थापित संस्था माना जाएगा.
स्पष्टीकरण :5 संदेहों को दूर करने के लिए, एत्दद्वारा यह घोषित किया जाता है कि किसी दान के संबंध में इस धारा के अंतर्गत तब तक कटौती स्वीकार्य होगी, जब तक कि ऐसा दान धन के रुप में न हो.
इंस्ट्रमेन्ट्स जो आपको टैक्स बचाने में मदद करते है :
लाइफ इंश्योरेन्स : लाइफ इंश्योरेन्स में किए गये सभी निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत राहत के पात्र होते है, केवल वे लाइफ इंश्योरेन्स योजनाए ही राहत की पात्र होती है जिन पर कम से कम 3 वर्ष की लॉक इन अवधि हो. विभिन्न लाइफ इंश्योरेन्स कंपनियों के पेन्शन प्लान्स के अंतर्गत अदा किए गये प्रीमियम भी टैक्स राहत के पात्र होते हैं लाडफ इंश्योरेन्स योजनाओं का एक बड़ा फायदा यह है, लाइफ इंश्योरेन्स योजनाओं गी टैक्स राहत के पात्र होते है, लाइफ इंश्योरेन्स योजनाओं का एक बड़ा फायदा यह है कि वे टैक्स रहित ब्याज आमदनी दिलाते है.
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्किम्स
यें म्यूच्युअल फ़ंड योजनाएं है. तथा इनके साथ बाज़ार के जोखिम होते हैं. ये भी बीमा योजनाओं की तरह, 3 वर्ष की लॉक-इन अवधि होने पर, धारा 80C के अंतर्गत टैक्स राहत के पात्र होते हैं. इन इंस्ट्रूमेन्ट्स में एक बड़ी कमी यह होती है कि ये जीवन बीमा नहीं प्रदान करते हैं.
पब्लिक प्रोविडेन्ट फ़ंड :
ये 15 वषर्र् हेतु निवेश होते हैं. तथा टैक्स-फ्री आमदनी प्रदान करते हैं. आमदनी की मौज़ूदा दर 8% हैं. इस इंस्ट्रूमेन्ट के अंतर्गत प्रतिवर्ष ़ज़्यादा से ़ज़्यादा रु. 70,000 का निवेश किया जा सकता है, जो कि धारा 80C के अंतर्गत राहत का पात्र है.
बैंक जामाएं :
किसी शिड्यूल्ड बैंक में 5 वर्षीय जमा राशियों पर टैक्स की राहत उपलब्ध है. यहां याद रखने की बात यह है कि सम्पूर्ण ब्याज आमदनी पर टैक्स लगता है.
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स
सरकार द्वारा प्रायोजित सिक्योरिटी सर्टिफिकेट्स जो कि रु. 100, रु. 500, रु. 1000, रु. 5000 तथा रु. 10,000 के मूल्य वर्गो में उपलब्ध है. किसी पोस्टऑफिस से सीधे या अधिकृत एजेन्ट्स के ज़रिए खरीदे जा सकते हैं. इस पर मूर्तमान में 8.16% वार्षिक की दर से छमाही देय ब्याज उपलब्ध है तथा 6 वर्षो की परिपक्वता अवधि के बाद मूलधन के साथ इनका भुगतान किया जाता है. वार्षिक रुप से अर्जित होने वाला ब्याज अपने आप पुनर्निवेशन हो जाता है तथा यह पुननिर्वेशन ब्याज भी आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत टैक्स में राहत का पात्र होता है. अर्जित ब्याज पर टैक्स लगता है.
होम लोन्स : आयकर अधिनियम की धारा 24 आपको आपके होम लोन पर अदा किये गये कुल ब्याज की उसी वित्तीय वर्ष हेतु आपकी टैक्स योग्य आमदनी से कटौती दिलाती है. आप होम लोन हेतु चुकाए गये मूलधन पर भी धारा 80C के अंतर्गत राहत पा सकते हैं.
ट्यूशन फीस :
दो बच्चों तक के लिए अदा की पूरी ट्यूशन फीस पर टैक्स से छूट प्राप्त है. किसी प्रकार के दान जैसे कि डेव्लपमेन्ट फीस आदि इसमें शामिल नहीं है.
उच्च शिक्षा पर लोन :
उच्च शिक्षा हेतु लिए गये लोन पर अदा किए गये ब्याज पर आयकर अधिनियम की धारा 80E के अंतर्गत कटौती का दावा किया जा सकता है. वर्तमान में इस धारा के अंतर्गत दावा किए जा सकनेवाली ब्याज की रकम की कोई ऊपरी सीमा नहीं है. हालांकि मूलधन पूर्णत: टैक्स योग्य है.
हेल्थ इंश्योरेन्स प्लान :
आयकर अधिनियम की धारा 80D के अंतर्गत स्वयं, जीवनसाथी, बच्चों तथा माता-पिता हेतु अदा किए गये प्रीमियम पर राहत उपलब्ध है. अपने, जीवनसाथी तथा बच्चों हेतु प्रीमियम की सीमा रु. 15,000 तय की गई है. माता- पिता हेतु अदा किए जानेवाली प्रीमियम पर और रु, 15,000 का लाभ उपलब्ध है, तथा अगर माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं तो ऊपरी सीमा बढ़कर रु. 20,000 हो जाती है.
धारा 80C में उन इंस्ट्रूमेन्ट्स को सूचीबध्द किया गया है, जिनमें टैक्स बचाने के लिए आप निवेश कर सकते हैं. आप इन सभी इंस्ट्रूमेन्ट्स में सम्मिलित रुप से अधिकतम रु. 1 लाख का निवेश कर सकते हैं और रु. 1 लाख की पूरी राशि को आपकी टैक्स योग्य आमदनी से घटा दिया जाएगा. आप निम्नलिखित निवेशों पर कटौती पा सकते है;
1. लाइफ इंश्योरेन्स पॉलिसी या यूनिट- लिंक्ड इंश्योरेन्स प्लान (यूलिप). यूलिप्स हेतु लॉक-इन अवधि 3 से 5 वर्ष है. तथा मिलनेवाली आमदनियों में आपके फ़ंड की कार्यकुशलता के आधार पर भिन्नता होती है. लेकिन अगर आपका वार्षिक प्रीमियम आपकी पॉलिसी पर बीमा राशि के 20 प्रतिशत से अधिक हो तो आपको टैक्स का लाभ नहीं मिलेगा.
2. म्यूच्युअल फ़ंड्स द्वारा पेश किया गया रिटांयरमेन्ट बेनिफिट प्लान. इसके उदाहरण हैं यूटी आई रिटायरमेन्ट बेनिफिट प्लान तथा टेम्पलटन इंडिया पेन्शन प्लान.
3. प्रोविडेन्ट फ़ंड, बशर्ते वो फ़ंड प्रोविडेन्ट ़फ़ंड एक्ट के अंतर्गत संरक्षित हो. इसका अर्थ है आपके द्वारा इम्पलाइज़ प्रोविडेन्ट फ़ंड (ईपीएफ) अकाउन्ट में वेतन में कटौती के जरिए किया गया निवेश तथा पब्लिक प्रोविडन्ट फ़ंड (पीपीएफ) में आपके द्वारा सीधे किया गया निवेश. आप पीपीएफ में प्रतिवर्ष रु. 70,000 तक का निवेश कर सकते है. ई पी एफ में आमदनी की वर्तमान दर 8.5 प्रतिशत तथा पीपीएफ में 8 प्रतिशत है.
4. कोई स्वीकृत सुपरएनुएशन फ़ंड आमतौर पर आपके नियोक्ता द्वारा आपकी ओर से आपके वेतन से निवेश राशि को काटकर यह किया जाता है.
5. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट्स (एनएससीज़)
6. म्यूच्युअल फ़ंड्स द्वारा पेश की गई इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ई एल एस एस)
7. इंश्योरेन्स कंपनियों द्वारा पेश की गई पेन्शन पॉलिसियां जहां पहले धारा 80ccc के अंतर्गत लाभ उपलब्ध थे. पहले, ऐसे निवेशों पर रु. 10,000 की सीमा थी, लेकिन अब इस सीमा को हटा दिया गया है.
8. बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट्स जो कि धारा 80c टैक्स लाभ प्रदान करते हैं. इन पर 5 वर्ष की लॉक इन अवधि होती है.
उपरोक्त उल्लेख किए गये निवेशों के अलावा, आपके द्वारा किए गये कतिपय व्ययों पर भी आप कटौती पा सकते है. मुख्यत: इसमें आपके होम लोन के मूलधन की अदायगी तथा अपने बच्चों के ट्यूशन फीस का भुगतान शामिल है.
निवेश विकल्प |
निवेश अवधि |
आमदनी निवेश (रु ) |
न्यूनतम / अधिकतम |
निवेश पर आमदनी |
नकदीकरण क्षमता |
बैंक 5 वर्षीय टैक्स सेविंग एफडी |
मध्यम |
निश्चित |
योजना के अनुसार भिन्नता |
टैक्स योग्य |
नहीं |
लाइफ इंश्योरेन्स |
लंबी |
मार्केट लिंक्ड |
योजना के अनुसार |
टैक्स से छूटम |
मध्यम |
पब्लिक प्रोविडेन्टफ़ंड |
लंबी |
निश्चित |
500-70,000 |
टैक्स योग्य |
निम्न |
इक्विटी लिंक्ड स्कीम |
मध्यम छोटी |
मार्केट लिंक्ड |
योजना के अनुसार भिन्नता |
टैक्स से छूट |
मध्यम |
नेशलन सेविंग सर्टिफिकेट |
मध्यम |
निश्चित |
100- कोई ऊपरी सीमा नहीं |
टैक्स योग्य |
नहीं |
पोस्ट ऑफिस सावधि जमा |
मध्यम |
निश्चित |
200- कोई ऊपरी सीमा नहीं |
टैक्स योग्य |
नहीं |
हालांकि अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है, तथापि धारा 80CCE के अंतर्गत लाभ रु. 1.00 लाख तक सीमित है.
लाइफ़ इंश्योरेन्स के साथ दोह टैक्स लाभ पाइए :
· नियमित प्रीमियम भुगतनों पर- अपने जीवन का बीमा करवानेे के लिए अदा किए गये सभी प्रीमियम रु. 1,00,000 तक को टैक्स से छूट प्राप्त है. जैसा कि आयकर अधिनियम थी धारा 80C में उल्लेख किया गया है.
· टैक्स रहित परिपक्वता आमदनियां पाइप-लाइफ इंश्योरेन्स पॉलिसियों में निवेश करने का एक सबसे बड़ा फायदा यह है. कि परिपक्वता पर मिलनेवाली पूरी रकम टैक्स रहित होती है.
· इस प्रकार, आप केवल लाइफ इंश्योरेन्स प्लान में निवेश करने के समय ही टैक्स नहीं बचाते है, बल्कि परिपक्वता के बाद भी पूरी टैक्स रहित आमदनी पाते है.
टैक्स स्लैब को समझना :
टैक्स स्लैब वह ब्रैकेट है, जो आपकी टैक्स दायिता की गणना करने के लिए आपकी प्रीमियम जिसके अंतर्गत आती है.
टैक्स योग्य आमदनी का निर्धारण समस्त स्रोतों से आपकी आमदनियों को ज़ोडकर और फिर विभिन्न धाराओं के अंतर्गत समस्त पात्र कटौतियों को घटाकर की जाती है.
टैक्स दर |
स्त्री |
वरिष्ठ |
नागरिकअन्य |
शून्य |
1,85,000 तक |
2,25,000 तक |
1,50,000 तक |
10% |
1,85,000 से
3,00,000 तक |
2,25,001 से
3,00,000 तक |
1,50,001 से 3,00,000 तक |
20% |
3,00,001 से
5,00,000 तक |
3,00,000 से
5,00,000 तक |
3,00,000 से 5,00,000 तक |
30% |
5,00,001 तक अधिक |
5,00,001 व अधिक |
5,00,001 व अधिक |
अगर एक वित्तीय वर्ष में कुल आमदनी रु. 10,00,000 से अधिक हो तो 10% का सरचार्ज भी लगाया जाएगा. इन्कम टैक्स तथा सरचार्ज की अंतिम राशि पर 2% का एज्यूकेशन सेश तथा 1% का सेकेण्ड्री व हायर एज्यूकेशन सेश भी देय होता है.
टैक्स दायिता की गणना को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए उदाहरण :
30 वर्ष के एक स्वस्थ पुरुष जिसकी आमदनी रु. 5,00,0000 है, हेतु टैक्स दायिता निन्म प्रकार होगी :
Particulars
|
Amount
|
Salary
Income
|
500000
|
Less
Professional Tax
|
-2500
|
Income
from House Property
|
100000
|
Interest
Income
|
20000
|
Interest
on Government securities
|
5000
|
Gross
Total Income
|
622500
|
Deductions
|
|
1. U/S
80D
|
20,000
|
2. U/S
80CCC
|
2,000
|
3. U/S
80DD
|
30,000
|
4. U/S
80C
|
80,000
|
Deductions
u/s 80 (Total)
|
-132000
|
Total
Taxable Income
|
490500
|
On First
150000
|
0
|
On Next
150000 @ 10%
|
15000
|
On
Balance @ 20%
|
38100
|
Total Tax
Payable
|
53100
|
Education Cess @ 2%
|
1062
|
Secondary
& Higher Education Cess @ 1%
|
531
|
Net
Tax Payable
|
54693
|
|